संपादन / खंडवा
‘प्रभा’ से ‘कर्मवीर’: खंडवा की संपादकीय दुनिया
माखनलाल चतुर्वेदी के लिए कविता के साथ अखबार भी सार्वजनिक काम था। पत्रिका के विषय चुनने से समर्थन खोने और औपनिवेशिक कार्रवाई झेलने तक की कहानी।
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माखनलाल चतुर्वेदी के लिए कविता के साथ अखबार भी सार्वजनिक काम था। पत्रिका के विषय चुनने से समर्थन खोने और औपनिवेशिक कार्रवाई झेलने तक की कहानी।